शनिवार, 31 जनवरी 2009
महिला समानता कोरी बकवास है
शुक्रवार, 23 जनवरी 2009
अब तो पाक सुधर जाओ
हाँ ये ओबामा हैं और ४० साल पहले जिस देश में काले लोगों को मतदान का अधिकार नही था आज उसी देश के सबसे ऊँचे पड़ पर एक अश्वेत आदमी बैठा हुआ है । आते ही उन्होंने अलग राग आख्तियार किया है और पाक को चेतावनी दी है की अपना रवैया आतंकवाद के प्रति सुधारो नही तो उसका कड़ा परिणाम भुगतना होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार पाक को जो भी अमरीकी मदद आतंक से लड़ने के लिए दी गयी थी उसके ८० % से भी अधिक का उसने दुरूपयोग किया है । यह देखते हुए ओबामा ने सख्त हिदायत दी है की अब उसे सही तेरीके से आतंक के ख़िलाफ़ लड़ना होगा । वैसे भी अमरीका ने आफ्गानिस्तान में अपनी लडाई को जारी रखने के लिए नया साथी खोजना शुरू कर दिया है जो पाक से ज्यादा विश्वशनीय होगा उसके बाद पाक पर ज्यादा नकेल कशी जा सकेगी और भारत का इससे ज्यादा फायदा होगा.बुधवार, 14 जनवरी 2009
नही बदली है हालत कोशी को कोसने वालों की
हाँ दोस्तों आप सब को यह मंजर तो याद ही होगा पूरा देश उस समय इन्ही के बारे में सोच रहा था । सरकार ने जहाँ बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया तो पूरे भारत से उनके लिए मदद की बयार आ रही थी लेकिन आज क्या हालत है उनकी यह जानने में न हमारी न ही आपकी ही कोई रूचि है । हमारी तो मजबूरी हो सकती है लेकिन सरकार की क्या मजबूरी हो सकती है क्योंकि जनता ने उन्हें चुना है और वे इस समय उनके दुःख से मुंह मोडे हुए है । क्या करे जब तक इसे लेकर राजनीति करनी थी कर ली अब क्या है हमारा ।आज भी हालत वैसे ही हैं बदला है तो बस इतना ही की अब वहन कोशी का पानी नही है । लेकिन लोगों की हालत तो बदतर हो गयी है क्या करे वे बही बाढ़ में अपना सब कुछ तो गवां तो चुके है अब उनके पास कुछ बचा ही नही है । आज वे भूखे पेट सो रहे हैं रात की ठंढ आग तापकर काट रहे हैं सो रहे हैं जानवरों के साथ । भूख ने तो लोगों को काल का नेवला बना दिया है । वहां तो खुशी की कोई बयार ही नही है न बच्चे न ही कहीं कोई सहनाई बज रही है।
वहां तो जिन बच्चों ने उस बाढ़ के समय जन्म लिया था उसका नाम भी उसी तरह का करदिया जैसे की कोशिका या फ़िर प्रलाय्मान इस तरह का नाम बच्चों को इस बाढ़ की दुःख भरी गाथा जिंदगी भर याद दिलाएगा ।
बिहार सरकार तो बस इस बात के लिए खुश हो रही है की हमने जैसा आपदा प्रबंधन किया है वैसा आज तक हुआनही है और लोग हमसे पूछने के लिए आ रहे है की आपने इतना बड़ा प्रबंधन कैसे किया ।
शनिवार, 10 जनवरी 2009
मध्यप्रदेश का सिंगुर बना सिंगरौली
एक सिंगूर अभी ख़त्म नही हुआ की दूसरे की तैयारी हो रही है । इस बार बारी बंगाल की नही बल्कि मध्यप्रदेश की है जहाँ सरकार ने सिंगरौली नामक स्थान पर एक पॉवर प्लांट बनने का निर्णय किया है । इससे वहां के लोगों में काफ़ी असंतोष है हो भी क्यों न क्योंकि जब पेट पर लात पड़ती है तो आदमी कुछ भी करने को तैयार हो जाता है । यहाँ एक सवाल पैदा होता है की क्या सिर्फ़ उस क्षेत्र के विकास के बारे में सरकार ही सोचती है जनता को नही लगता की इससे हमारा विकास होगा । यदि जनता को नही लगता तो फ़िर सरकार वैसा विकास करने पर क्यों तुली हुई है जिससे की जनता ही खुश ही नही है । एक तो सरकार जनता की खिलाफत करे और फ़िर विकास की गंगा बहने की बात करे तो फ़िर क्या फायदा कोई हमें बताएगा की दुनिया के किस स्वस्थ लोकतंत्र में ऐसा होता है । हमें बिजली रोटी दाल की कीमत पर नही चाहिए । यदि सरकार रोजगार देने की बात करती है तो ये भी ग़लत है क्योंकि इस पॉवर प्लांट में बहार के लोगों को ही नौकरी मिलेगी यहाँ के लोगों का हाल भी सिंगुर के लोगों के जैसा ही होगा ।
अभी समय है जनता के साथ सलाह मशविरा कर सरकार इस मामले का कोई निदान निकाले नही तो फ़िर पानी की भांति खून बहेगा , लाशें बिछेंगी और फ़िर अंजाम सिंगुर वाला ही होगा।