
आज भी हालत वैसे ही हैं बदला है तो बस इतना ही की अब वहन कोशी का पानी नही है । लेकिन लोगों की हालत तो बदतर हो गयी है क्या करे वे बही बाढ़ में अपना सब कुछ तो गवां तो चुके है अब उनके पास कुछ बचा ही नही है । आज वे भूखे पेट सो रहे हैं रात की ठंढ आग तापकर काट रहे हैं सो रहे हैं जानवरों के साथ । भूख ने तो लोगों को काल का नेवला बना दिया है । वहां तो खुशी की कोई बयार ही नही है न बच्चे न ही कहीं कोई सहनाई बज रही है।
वहां तो जिन बच्चों ने उस बाढ़ के समय जन्म लिया था उसका नाम भी उसी तरह का करदिया जैसे की कोशिका या फ़िर प्रलाय्मान इस तरह का नाम बच्चों को इस बाढ़ की दुःख भरी गाथा जिंदगी भर याद दिलाएगा ।
बिहार सरकार तो बस इस बात के लिए खुश हो रही है की हमने जैसा आपदा प्रबंधन किया है वैसा आज तक हुआनही है और लोग हमसे पूछने के लिए आ रहे है की आपने इतना बड़ा प्रबंधन कैसे किया ।
1 टिप्पणी:
बहुत बढ़िया
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आप भारतीय हैं तो अपने ब्लॉग पर तिरंगा लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue
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