वादा किया वो कोई और था, वोट मांगने वाला कोई और
8 महीने पहले
जो कदम कल शिवराज पाटिल ने उठाया वह उन्हें १ साल पहले उठा लेना चाहिए था । लेकिन क्या करे सत्ता का मोह ऐसा है की छूटता ही नही है खैर इसमे उनका कोई दोष नही है । सबसे बड़ी बात यह है की यूपीए के घटक दल भी इनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है की सत्ता में शामिल लोग ही उनके काबिलियत को लेकर पेराश्न्चिंहउठा रहे हैं । खैर अब उनको भी शान्ति मिल गयी होगी की देर से ही सही लेकिन कदम उठाया तो गया । अब इस समय इस बात से भी इनकार नही किया जा सकता की यह कदम चुनावी लाभ उठाने के लिए लिया गया है । मुंबई में एक तरफ़ जान बचने की कशमकश चल रही थी दूसरी तरफ़ दिल्ली में मतदान हो रहा था उस समय लोगों के दिमाग पर बमविस्फोट का भय चढा हुआ था ऐसे में मतदान का रूख भी बदला । कांग्रेस को लगा की यही समय है जरूरी फेरबदल कर लिया जाए नही तो इसका नुक्सान लोकसभा चुनाव में हो सकता है । कांग्रेस के नेता जिस तरह बयां दे रहे हैं उससे भी वे लोग लगता नही की वे ज्यादा गंभीर हैं । आर आर पाटिल महाराष्ट्रा के गृह मिनिस्टर का बयां तो निःसंदेह हाश्यास्पद था ।
आज अखबार खोला और जब ख़बर पढ़ा तो लगा की जो सरकार को चुनती है उसके प्रति सरकार का कोई दायित्वा नही है और जो लोग वोट देने नही जाते सरकार उनकी चिंता ही ज्यादा करती है । अब तो कहना पडेगा की प्रजातंत्र अमीरों का ,अमीरों के लिए और अमीरों की सरकार है तो यह ग़लत नही होगा । आप ही जरा बताइए इस देश में मदद की जरूरत किसे है गरीबो को या एयरलाइन्स के मालिकों को , आमजन को गाड़ी चलाबे के लिए ५५ रुपये में पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है लेकिन एयरलाइन्स के मालिकको हवाई जहाज चलाने के लिए तेल ४० से भी कम दाम पर तेल मिल रहा है । अब क्यों मिल रहा है इस बारे में तो सरकार ही बता सकती है लेकिन हमें तो यही लगता है की देश में कृषि सिंचाई सुविधा से ज्यादा एयरलाइन्स को मदद पहुँचने की है । ज्यादा उत्पादन होने से पेट भरेगा लेकिन ज्यादा जहाज पर चढ़ने से पैसा घटेगा और यह हमारा पेट ही काटेगा । लेकिन सरकार के लिए जहाज ज्यादा महत्वपूर्ण है । यदि ऐसा है तो चुनावी घोषणापत्र में जनता के लिए इतने वादे क्यों करते हैं बेहतर तो यही हीकी आप इन अमीरों के लिए ही वादे करें। यही आपको वोट देंगे और पैसा भी॥ पर्यटन उद्योग घाटे में जाने से इतना बड़ा अहित नही होता जितना की अभी सरकार कर रही है । क्यों चुनावों के समय गरीबी हटाने का रोना रोते है । बेहतर तो होगा की इन गरीबों को ही हटा दे। न रहेगा बॉस न बजेगी बांसुरी .मतलब न रहेंगे गरीब न होंगी तकलीफ । फ़िर सरकार और उनके अमीर दोस्त सब खुश रहें..
आज दुनिया का हर रिश्ता हाशिये पर है चाहे माँ बाप का हो या कोई अन्य रिश्ता हर रिश्ते की एक ही हालत है किसी भी रिश्ते पर कोई भी विश्वास नही करता । सवाल उठता है क्यों नही करता आख़िर जब बेटा बेटी ही माँ बाप का कत्ल करने लगेंगे तो कैसे कोई विश्वास करेगा किसी पर । जिस दिन मिस मेरठ की माँ ने उसे जन्म दिया होगा उस दिन सोचा भी नही होगा की एक दिन इसी के हाथों मेरेहत्या होगी । कम से कम इतना बुरा तो कोई नही सोचता आख़िर सोचे भी तो कैसे वह अपना खून है वह कैसे दगा कर सकता है । लेकिन आज ऐसा हो रहा है मिस मेरठ ने अपने दोस्त की मदद से अपने परिजनों की हत्या की है इसके पीछे की कहानी जो भी हो लेकिन बात इतनी गंभीर भी नही थी की उसका अंजाम ह्त्या होता । आज माता पिता दुनिया में तो नही ही रहे लेकिन मिस मेरठ को क्या हासिल हुआ जिल्लत लोगों की गाली । यही न या कुछ अच्छी चीज़ मिली हमें नही लगता की कोई अच्छी चीज़ मिली होगी । माना की आज पैसों का महत्वा बढ़ गया है लेकिन इतना भी नही की हम दुनिया के हर रिश्ते को टाक पे एअख दे । अब भी समय है की हम अपनी नैतिकता को बचा सकते हैं वरना आज तक जो हम दुनिया को नैतिकता का जो पाठ पढाते है कल से हमारे पास वह भी नही होगा ।
दोस्तों प्लीज चिंता मत कीजिये मैं जो कह रहा हूँ वह कोई आश्चर्य नही है क्योंकि जरा सोचकर देखिये की हमारे लिए तो ६ घंटे की नींद तो जरूरी होती है लेकिन क्या पैसा कभी सोता है क्या । यदि भारत में जागता है तो कही और सोता है , कही और जगता है तो भारत में सोता है। ऐसे में यह ख़याल आना सहज है की क्या इसे नींद नही आती क्या । यदि आप किसी को अचानक पूछेंगे की कौन कभी नही सोता है तो शायद ही कोई जवाब दे पाए लेकिन जब आप बताएँगे तो शायद ही कोई इनकार करे । ठीक वैसे ही कोई इसका स्थाई दोस्त भी नही होता किसी को अमीर और किसी को गरीब बनते देर ही कितनी लगती है आजकल । हम अमेरिका के उदहारण को देख सकते हैं । तो इस सख्स से जरा बचकर रहिये.नही तो आपको भी यह नाग के स्टाइल में दस सकता है।जब आपकी पार्टी में कोई नेता होता है तो आप उसकी इज्जत करते हैं और वह भी आपकी इज्जत करता है लेकिन यदि आप उसकी इज्जत लेने पर उतारू हो तो फ़िर क्या होगा । वह भी ऐसे समय में जब चुनाव हो उस समय आपकी एक एक हरकत मिडिया के सामने होती है और आप गलती कर बैठती है तो फ़िर आपको भोगना तो पड़ेगा ही न । जरा बताइए इस समय उमा भारती पर क्या बीत रही होगी जब पार्टी का एक नेता उनके द्वारा अपमान किए जाने पर पार्टी छोरकर चला जाता है तो आपकी जगहसाई होगी न । तो फ़िर क्यों करते हैं ऐसा । इस समय यदि आपके पार्टी की अन्दर की बातों को यदि वह लीक कर दे तो नुक्सान किसका होगा बताइए । आप सीएम बनाना चाहती हैं वह तो फिलहाल नही चाहता । तो सिर्फ़ अपनी ही इज्जत मत कीजिये दूसरों की भी इज्जत किया कीजिये ।
अभी पूरी दुनिया में मंदी है लेकिन ऐसा लगता है की आतंकियों की दुनिया इससे अप्रभावित है वहां कोई मंदी नही है । पिछले कई महीने में इतने सारे बम विस्फोट हो चुके हैं की कही से भी नही लगता की यहाँ अभी मंदी है । दरअसल बात यह है की इनका जो आका है न पकिस्तान वह मंदी से काफ़ी प्रभावित है उसकी हालत इतनी ख़राब हो चुकी है की अब वह आतंकियों को धन नही दे सकता । इससे आतंकी संघटन भी घबरा गए हैं उन्हें लगने लगा है की जो करना है जल्दी कर लो बाद में पता नही कुछ करने को मिले भी या नही । तो जो भी आतंकी कार्रवाई हो रही है वह हताशा का नतीजा है उससे ज्यादा कुछ भी नही। लेकिन यह कहकर हम और हमारी सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच नही सकते आख़िर दायित्वा हमारा भी है की हम भी देशः को कुछ दे । कम से कम ऐसे बुरे समय में हम अपने ऊपर संयम रखकर और दूसरो की मदद कर हम मदद कर सकते हैं।,
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष rअज ठाकरे जो इस समय काली करतूत कर रहे हैं उसकी जितनी भर्तसना की जाए कम है क्योंकि जो काम वो कर रहे है वह कहीं से भी जायज नही है आख़िर किसने उनको यह अधिकार दिया की वे बिहारियों पर जुल्म धाएं । यह उनकी राजनितिक हताशा का प्रतिक है यह दर्शाता है की जनता के मध्य उनका जनाधार कम है इसलिए भी वे इस तरह के ग़लत कार्य कर रहे हैं । इसका सीधा लाभ उनके विपक्ष को मिलेगा उन्हें यह लगता होगा की हम सारा काम मराठियों के हित के लिए कर रहें हैं लेकिन बिहार टाटानगर में जो लोगों पर हमले हो रहे हैं क्या वे कभी राज ठाकरे को माफ़ करेंगे । यहाँ राज ठाकरे यह बताएं की वे अपना जनाधार किन मराठियों के मध्य बनाना चाहते हैं वे जो सिर्फ़ महाराष्ट्र में रहते हैं या फ़िर देश के अन्य भागों में रहने वाले मराठियों के मध्य भी । इतिहास गवाह है की आज तक हिंसा से किसी का भी भला नही हुआ है फ़िर यह बात उनके समझ में कुओं नही आती । राज ठाकरे के घटना को लेकर देश के अन्य भागो में जो प्रतिक्रिया हो रही है जो हिंसक करवाई हो रही है उसका देश के सेहत पर बहुत ख़राब प्रभाव पड़ेगा ।
आपका यह अंदाज अब हम सबको ज्यादा दिन तक देखने को नही मिलेगा क्योंकि आपने संन्यास की घोषणा कर दी है । आपका कार्यकाल बहुत अच्छा रहा है आपने भारतीय क्रिकेट को एक नयी पहचान दी है दुनिया के सभी क्रिकेट खेलने वाले देशों पर आपने जीत दर्ज की है । आपकी विदाई सम्मानजनक तरीके से हो रही है सारा भारतीय क्रिकेट आपका कर्जदार रहेगा । आपने सही समय पर संन्यास लिया है इस समय जब ढेर सारे नए क्रिकेटर आ रहे है और आप पर अच्छा प्रदर्शन का दबाव था आपने संन्यास की घोषणा कर थोड़ा सा अचंभित तो जरूर किया लेकिन मेरे ख़याल से सही किया क्योंकि आप अपने कैरियर के अन्तिम श्रंखला में और अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे वह भी बिना किसी दबाव के । इस समय जो फैब फॉर के विदाई की बात चल रही है उसका श्रीगणेश आपने कर दिया है आशा करते हैं की अन्य लोग भी आपका अनुसरण करेंगे लेकिन प्लीज़े एक साथ संन्यास मत लीजियेगा नही तो टीम बिखर जायेगी । आशा है आप सदा भारतीय क्रिकेट की सेवा करते रहेंगे।
आजकल आप कुछ ज्यादा ही जनकल्याण का कार्य कर रहे हैं ऐसा क्यों क्योंकि चुनाव आने वाला है । मतलब सीधा है की आपलोग जनता को मूर्ख समझते हैं की २ दिन कचरा उठाकर या फ़िर जनकल्याण का कार्य कर आप जनता को अपने पक्ष में कर लेंगे । जितनी म्हणत आप इस कार्य में कर रहे है उतना वक्त आपने अपने कार्यकर्ताओं को देकर समझाया होता की वे जनकल्याण का कार्य करें तो आज आपको न तो कचरा उठाना पड़ता न कुछ और कार्य जो आप आज कर रहे हैं । जनता के पास एक मौका होता है जिसका इस्तेमाल वह ५ साल में करती है और राजा को फ़कीर बना देती है इसका अंदाजा आपको लग गया इसलिए आप जनकल्याण का कार्य कर रहे हैं लेकिन अभी ही क्यों कर रहें हैं पिछले ४ साल से आप कहाँ सोये हुए थे । आपको तो युवराज कहा जाता है तो फ़िर आप यह क्यों कर रहे हैं , यदि आप यह करेंगे तो फ़िर अन्य लोग क्या करेंगे । आप तो जहाँ भी जाते हैं और जो भी करते है वह तो पूर्व नियोजित होता है तो फ़िर ऐसा दिखावा क्यों मत कीजिये मैं तो बस इतना ही कहूँगा ।| लगातार बम्बिस्फोतों से देश के कई शहर जल रहें है जयपुर अहमदाबाद डेल्ही क्या बात करें पूरा देश ही जल जाएगा क्यों नहीं यह रफ्त्तार कम हो रही है या रूक रही है ,इन सब का असर तो आमजनता पर ही पड़ता है । नेताओं का क्या है वो तो एसी के अंदर ही बंद रहते है मरे भी तो जनता जो भी हो जनता का हो । आज भास्कर में छपी रिपोर्ट के अनुसार गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने तीन बार मिडिया से बात करने के दौरान ड्रेस बदली मतलब जनता मरे कोई बात नही हमें तो मंत्री होने का परिचय देना है । जरा कोई पूछे उनसे की उन्हें किसी फैशन परेड में जाना था क्या यदि वहीँ जाना था तो फ़िर दिखावटी तौर पर अस्पताल क्यों गए । हर विस्फोट के बाद वे एक ही तरह का बयान देते है लेकिन आज तक पहले के सभी मामलों की जांच की दिशा में कोई ख़ास प्रगति नहीं हो पायी है आज देश के पास आतंकवाद से लड़ने का कोई हथियार नहीं है एक जो पोटा था उसे भी ख़त्म कर दिया गया तो बताइए अब क्या होगा। |